Friday, June 28, 2019

पाकिस्तान के कप्तान सरफ़राज़ को 'मोटा.......' कहने पर पत्नी ने क्या किया

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने कहा है कि खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ की गई व्यक्तिगत टिप्पणियां नहीं होनी चाहिए, लेकिन सोशल मीडिया के ज़माने में इसे रोकने के लिए वो कुछ नहीं कर सकते.
भारत के ख़िलाफ़ मैनचेस्टर में ओल्ड ट्रैफ़र्ड में 89 रन से मुक़ाबला गंवाने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम को चौतरफ़ा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. इसमें कप्तान सरफ़राज़ समेत कई खिलाड़ियों को निजी तौर पर निशाना भी बनाया गया था.
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सरफ़राज़ इंग्लैंड में अपने बेटे को गोद में लिए हुए एक मॉल में जाते हुए दिख रहे हैं और तभी एक कथित प्रशंसक उन्हें रोकता है और ये पूछता है कि वह '............जैसे मोटे' क्यों दिख रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें कप्तान सरफ़राज़ ने माना कि भारत के ख़िलाफ़ मैच के बाद जिस तरह और जिस तरीक़े से आलोचनाएं हुईं उससे उन्हें दुख पहुँचा है, लेकिन उन्होंने उन लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने उनका और टीम का हौसला बढ़ाया.
उन्होंने कहा, "बिल्कुल, बुरा तो बहुत लगा था. वो वाक़या दो दिन पहले का था और वीडियो मैच से एक दिन पहले आया था. मुझे लगा था कि वो (वीडियो बनाने वाला शख़्स) शायद ऐसा नहीं करेगा, क्योंकि उस वक़्त उसकी फ़ैमिली भी उसके साथ थी और उसके परिवार के एक व्यक्ति ने मुझसे आकर उस व्यक्ति की ग़लती के लिए माफ़ी मांगी थी. मुझे अपने लिए तो नहीं, लेकिन क्योंकि अब्दुल्लाह (बेटा) साथ था, इसलिए बहुत दुख हुआ और बुरा लगा. मेरी बॉडी लैंग्वेज बहुत डाउन हो गई थी."
ऐसी टिप्पणियों के बाद ख़ुद पर उन्होंने कैसे क़ाबू रखा? इस सवाल पर सरफ़राज़ ने कहा, "देखिए, ग़ुस्सा तो मुझे बहुत आया था. लेकिन उस समय अगर मैं लड़ाई करता तो हो सकता है कि मेरी असलियत लोगों के बीच नहीं आती और मेरी निगेटिव चीज़ ही दिखती. मैंने ख़ामोश रहना बेहतर समझा और सब कुछ अल्लाह पर छोड़ दिया. जब ये वीडियो सामने आया तो सब लोग मेरे पक्ष में खड़े हो गए."
पाकिस्तानी कप्तान ने माना कि इस घटना का परिवार पर भी बहुत असर पड़ा.
सरफ़राज़ ने बताया, "घरवाले क्या, जिसने भी ये वीडियो देखा, उसने कहा कि ये ग़लत हरकत थी. जहाँ तक मेरी पत्नी की बात है तो जब मैं रूम में गया तो वो बैठकर रो रही थी. मैंने उनसे कहा कि ये तो सिर्फ़ एक वीडियो है, जो सामने आया है. लोग तो हमारे मुंह पर ही न जाने क्या-क्या कहते हैं. ऐसी कोई बात नहीं है, ये सब चीज़ें तो लाइफ़ का हिस्सा हैं. जब बुरा करेंगे तो ये सब चीज़ें भी सहनी पड़ेंगी."
सरफ़राज़ ने माना कि बुरे प्रदर्शन के बाद प्रशंसकों का ग़ुस्सा होना लाज़मी है. उन्होंने कहा, "जब हम जीतते हैं तो वो हमें सर पर भी बिठाते हैं और हारते हैं तो उनका ग़ुस्सा करना जायज़ है."
उन्होंने कहा, "एक चीज़ बहुत अहम है कि हमारे प्रशंसक हमें बहुत प्यार करते हैं, और जब हम बाहर मुल्क में खेलते हैं तो हमें बहुत हौसला मिलता है. भारत से हारने के बाद हमारा एक हफ्ता बहुत बुरा गुज़रा. लेकिन इसके बाद जिस तरह से हमने दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ खेल दिखाया उसके बाद पब्लिक ने हमें जिस तरह का समर्थन दिया वो बहुत ज़बर्दस्त था."

Monday, June 24, 2019

انتقل مفهوم مفتاح "أعجبني" من فيسبوك إلى يوتيوب وتويتر لينتشر عبر الإنترنت

وصمم ألكسندر كوغان، زميل كوزنسكي، تطبيقا إلكترونيا يعمل عبر موقع التواصل الاجتماعي فيسبوك لاختبار ما يعرف بـ "السمات الخمس الكبرى للشخصية" وهي الانفتاحية والاجتهاد أو الضمير والانبساطية والقبولية والعصابية.
وكان استخدام هذا الاختبار يسمح للباحثين بالإطلاع على معلومات حسابات المستخدمين على فيسبوك مثل السن، والنوع الاجتماعي (الجندر)، والتوجه الجنسي، وغيرها من التفاصيل الشخصية. وبالفعل انتشر استخدام هذا التطبيق بين رواد موقع التواصل الاجتماعي.
واتسعت قاعدة البيانات الخاصة بالتطبيق لتشمل الملايين من مستخدمي فيسبوك، وأصبحت لدى الباحثين إمكانية التعرف على ما "أعجب" هؤلاء الملايين علاوة على المعلومات العامة لأصدقائهم.
وأدرك كوزنسكي، الذي أصبح الآن أستاذا في السلوك التنظيمي (أي المتعلق بالمنظمات والمؤسسات) في جامعة ستانفورد، في ذلك الوقت أن هذه المعلومات تنطوي على كنز لا يقدر بثمن من الأفكار الموحية.
فعلى سبيل المثال، كشفت هذه المعلومات عن أن عدد المثليين الذين يحبون أدوات التجميل من ماركة "ماك" أكثر بقليل من عدد الرجال من ذوي التوجهات الجنسية الطبيعية الذين يحبون الماركة نفسها. واستخلص كوزنسكي هذه المعلومة من بعض البيانات المتوافرة لديه وذلك لأنه ما كان ليتمكن من تمييز أن شخص ما من المستخدمين لفيسبوك لديه توجهات جنسية مثلية من مجرد ضغطة واحدة على مفتاح "أعجبني".
لكن كلما ارتفع عدد الضغطات على مفتاح الإعجاب، كلما تمكن الباحث من التوصل إلى تخمينات أدق للتوجهات الجنسة، والانتماءات الدينية، والميول السياسية، وغيرها من التخمينات.
ويخلص كوزنسكي إلى أنك إذا أبديت إعجابا بسبعين شيئا، فأنه سيعرفك أفضل من أصدقائك، أما بعد 300 علامة إعجاب فإنه سيعرفك بطريقة أفضل من شريك حياتك.
ومنذ ذلك الحين،وضع فيسبوك قيودا حدد فيها نوع البيانات التي يمكن التشارك بها مع مطوري التطبيقات الإلكترونية.
لكن ثمة مؤسسة واحدة فقط ما زالت قادرة على الإطلاع على كل ما يعجبك وما هو أكثر من ذلك، هي مؤسسة فيسبوك نفسها.
فهي المؤسسة التي بإمكانها تحمل دفع رواتب كبيرة لأبرع مطوري التعليم الآلي بهدف استخلاص النتائج.
ويمكننا القول أن فيسبوك فقط يسهل عملية استهداف المستخدمين بالإعلانات.
فمن قد يعترض إذا طلب المعلن من فيسبوك أن يظهر الإعلان لمحبي قيادة الدراجات المقيمين في سبرنغفيلد فقط؟ وهو مثال حي على المبررات التي تستند إليها شركة فيسبوك في الترويج لمفهوم "الإعلانات الموجهة".
وهناك أشياء أخرى يمكن لفيسبوك أن تقوم بها من خلال استغلال ما تعرفه عن المستخدمين، لكنها أشياء قد لا نحبها.
لنضرب مثلا بنشر إعلان لبيع منزل من دون أن يظهر للأمريكيين من أصول أفريقية. وقد تساءلت كل من جوليا أنغوين ومادلين فارنر، اللتين تعملان في موقع بروببليكا الاستقصائي،عن أمكانية نجاح تجربة مثل هذا الاعلان،وقد نجحت بالفعل.
لكن شركة فيسبوك ابدت ندهاشها لسماع هذه النتيجة، وأكدت أن هذا ما كان ينبغي أن يحدث، مبررة ما حدث بأنه "خطأ تقني".
وماذا عن مساعدة المعلنين على فيسبوك في الوصول بإعلاناتهم إلى المستخدمين الذين عبروا عن اهتمامهم بعبارة "كاره اليهود"؟ وهو ما أظهر نفس فريق العمل في بروبوبليكا أنه ممكن. وكررت شركة فيسبوك دهشته متعهدة بألا يحدث ذلك مرة ثانية.
ومن الطبيعي أن يثير ذلك القلق لدينا لأن ليس كل المعلنين يستهدفون الترويج لأشياء مفيدة مثل متجر الدراجات الهوائية، فهناك من يستخدم الإعلانات لنشر رسائل سياسية قد يصعب على المستخدمين وضعها في سياقها الصحيح أو التحقق منها.
وتساءل بعض الخبراء الذين نظروا في أزمة كمبريدج إناليتيكا إلى أي مدى كانت هذه الشركة فعالة حقا. ففي كل عمليات الاستهداف أفاد محللون أن مشاهدة إعلانات فيسبوك عبر الضغط عليها لفتحها مازالت بمعدل أقل من واحد في المئة.
وينبغي نقلق حيال كفاءة فيسبوك غير المشكوك فيها في وضع المزيد من الإعلانات التي تستحوذ على قدر كبير من اهتمامنا وتجعلنا ملتصقين بالشاشات.
وكيف سندير التزاماتنا في عالم التواصل الاجتماعي الجديد الجريء؟
ينبغي أن ننمي لدينا نوعا من الذكاء العاطفي بشأن الأثر الذي يحدثه فينا اللوغارتم. وإذا كان نيل الاستحسان الاجتماعي (اعجاب الآخرين) حيويا بالنسبة لنا ولا يقل أهمية من الأكسجين، فربما يكون المزيد من "حب الذات" هو الإجابة الأكثر دقة.
فإذا رأيت أي رسومات كوميكس عن هذا الموضوع سأكون متأكدا من أنني سأضغط على "علامة الإعجاب".

Thursday, June 13, 2019

旱灾死亡人数超过其他灾害致死人数的总和

2015年,当世界各国政府被问及将如何应对气候变化时,为什么140多个国家都提及土地问题呢?

联合国防治荒漠化公约》( )执行秘书莫妮卡·巴布说,答案是干旱。

从非洲向欧洲移民的社会和政治影响大家有目共睹,但不知诸位是否意识到这些移民全都来自干旱的地区?”巴布最近在与一些前往德国波恩报道联合国气候峰会的记者们交谈时曾经这样问他们。

巴布解释说,“大多数人唯一的财产就是土地,由于气候变化,人们的土地资源越来越贫瘠。每年旱灾导致的死亡人数都超过其他灾害的致死人数总和。今年,非洲之角有2500万人失去了赖以生存的基础。”

这个问题是可以解决的——每英亩土地的恢复成本仅不到300美元(1986人民币)。巴布表示,为满足日益增长的人口需求,恢复土地势在必行。每年需要新增四百万公顷(六千万亩)可耕土地。

而这些新增土地从哪里来呢?唯一的解决办法是恢复退化的土地。全球有20亿公顷的退化土地具备恢复潜力。据巴布的观点,只要恢复其中3亿公顷的土地就可以确保2050年之前的全球粮食供应安全,并且还可以使二氧化碳的排放缺口减少三分之一

巴布表示,人们围绕气候变化的其他应对方法展开了大量讨论,但却“很少提到土壤荒漠化治理这个方法,原因就是这个方法的大部分成本是人工成本,而且也缺少大公司的参与。”

但是土地修复的确可以提高土壤的碳封存能力,所以也开始引起了一些关注。”


做好准备

巴布认为,在一个气候变化日益严峻的时代,所有国家都需要做好应对干旱的准备。目前,美国、澳大利亚、以色列三国已经建立了干旱防范系统。她说:“我们已经开始筹建干旱防范机制。”

该机制以
土地退化零增长( )基金的形式,计划到2018年初筹集3亿美元(19亿元人民币),规模仅次于可再生能源发展基金。巴布说,该基金与可再生能源基金的使用方式一样,以援助资金作为担保,开发符合银行贷款条件的项目

不可持续的耕作方式和气候变化每年导致1200万公顷的土地遭到破坏。巴布称,“我们希望每年恢复相同数量的耕地,争取在2030年达到土地退化零增长的目标。”

她发现,《防治荒漠化公约》仅靠植树造林项目防治荒漠化是不够的。该组织还有必要开展其他相关项目。


巴布说:“土地权属不清会导致荒漠化

牧民与农民之间的水资源冲突日益严峻,并且在世界各地普遍存在。《防治荒漠化公约》的全球行动目标是在这个气候变化的时代,恢复农业的可持续性,特别是恢复边缘地区和旱作农业区的可持续农业。这样才能保留住1万多年来人类文明赖以生存的基础。