Friday, June 28, 2019

पाकिस्तान के कप्तान सरफ़राज़ को 'मोटा.......' कहने पर पत्नी ने क्या किया

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने कहा है कि खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ की गई व्यक्तिगत टिप्पणियां नहीं होनी चाहिए, लेकिन सोशल मीडिया के ज़माने में इसे रोकने के लिए वो कुछ नहीं कर सकते.
भारत के ख़िलाफ़ मैनचेस्टर में ओल्ड ट्रैफ़र्ड में 89 रन से मुक़ाबला गंवाने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम को चौतरफ़ा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. इसमें कप्तान सरफ़राज़ समेत कई खिलाड़ियों को निजी तौर पर निशाना भी बनाया गया था.
सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सरफ़राज़ इंग्लैंड में अपने बेटे को गोद में लिए हुए एक मॉल में जाते हुए दिख रहे हैं और तभी एक कथित प्रशंसक उन्हें रोकता है और ये पूछता है कि वह '............जैसे मोटे' क्यों दिख रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें कप्तान सरफ़राज़ ने माना कि भारत के ख़िलाफ़ मैच के बाद जिस तरह और जिस तरीक़े से आलोचनाएं हुईं उससे उन्हें दुख पहुँचा है, लेकिन उन्होंने उन लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने उनका और टीम का हौसला बढ़ाया.
उन्होंने कहा, "बिल्कुल, बुरा तो बहुत लगा था. वो वाक़या दो दिन पहले का था और वीडियो मैच से एक दिन पहले आया था. मुझे लगा था कि वो (वीडियो बनाने वाला शख़्स) शायद ऐसा नहीं करेगा, क्योंकि उस वक़्त उसकी फ़ैमिली भी उसके साथ थी और उसके परिवार के एक व्यक्ति ने मुझसे आकर उस व्यक्ति की ग़लती के लिए माफ़ी मांगी थी. मुझे अपने लिए तो नहीं, लेकिन क्योंकि अब्दुल्लाह (बेटा) साथ था, इसलिए बहुत दुख हुआ और बुरा लगा. मेरी बॉडी लैंग्वेज बहुत डाउन हो गई थी."
ऐसी टिप्पणियों के बाद ख़ुद पर उन्होंने कैसे क़ाबू रखा? इस सवाल पर सरफ़राज़ ने कहा, "देखिए, ग़ुस्सा तो मुझे बहुत आया था. लेकिन उस समय अगर मैं लड़ाई करता तो हो सकता है कि मेरी असलियत लोगों के बीच नहीं आती और मेरी निगेटिव चीज़ ही दिखती. मैंने ख़ामोश रहना बेहतर समझा और सब कुछ अल्लाह पर छोड़ दिया. जब ये वीडियो सामने आया तो सब लोग मेरे पक्ष में खड़े हो गए."
पाकिस्तानी कप्तान ने माना कि इस घटना का परिवार पर भी बहुत असर पड़ा.
सरफ़राज़ ने बताया, "घरवाले क्या, जिसने भी ये वीडियो देखा, उसने कहा कि ये ग़लत हरकत थी. जहाँ तक मेरी पत्नी की बात है तो जब मैं रूम में गया तो वो बैठकर रो रही थी. मैंने उनसे कहा कि ये तो सिर्फ़ एक वीडियो है, जो सामने आया है. लोग तो हमारे मुंह पर ही न जाने क्या-क्या कहते हैं. ऐसी कोई बात नहीं है, ये सब चीज़ें तो लाइफ़ का हिस्सा हैं. जब बुरा करेंगे तो ये सब चीज़ें भी सहनी पड़ेंगी."
सरफ़राज़ ने माना कि बुरे प्रदर्शन के बाद प्रशंसकों का ग़ुस्सा होना लाज़मी है. उन्होंने कहा, "जब हम जीतते हैं तो वो हमें सर पर भी बिठाते हैं और हारते हैं तो उनका ग़ुस्सा करना जायज़ है."
उन्होंने कहा, "एक चीज़ बहुत अहम है कि हमारे प्रशंसक हमें बहुत प्यार करते हैं, और जब हम बाहर मुल्क में खेलते हैं तो हमें बहुत हौसला मिलता है. भारत से हारने के बाद हमारा एक हफ्ता बहुत बुरा गुज़रा. लेकिन इसके बाद जिस तरह से हमने दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ खेल दिखाया उसके बाद पब्लिक ने हमें जिस तरह का समर्थन दिया वो बहुत ज़बर्दस्त था."

Monday, June 24, 2019

انتقل مفهوم مفتاح "أعجبني" من فيسبوك إلى يوتيوب وتويتر لينتشر عبر الإنترنت

وصمم ألكسندر كوغان، زميل كوزنسكي، تطبيقا إلكترونيا يعمل عبر موقع التواصل الاجتماعي فيسبوك لاختبار ما يعرف بـ "السمات الخمس الكبرى للشخصية" وهي الانفتاحية والاجتهاد أو الضمير والانبساطية والقبولية والعصابية.
وكان استخدام هذا الاختبار يسمح للباحثين بالإطلاع على معلومات حسابات المستخدمين على فيسبوك مثل السن، والنوع الاجتماعي (الجندر)، والتوجه الجنسي، وغيرها من التفاصيل الشخصية. وبالفعل انتشر استخدام هذا التطبيق بين رواد موقع التواصل الاجتماعي.
واتسعت قاعدة البيانات الخاصة بالتطبيق لتشمل الملايين من مستخدمي فيسبوك، وأصبحت لدى الباحثين إمكانية التعرف على ما "أعجب" هؤلاء الملايين علاوة على المعلومات العامة لأصدقائهم.
وأدرك كوزنسكي، الذي أصبح الآن أستاذا في السلوك التنظيمي (أي المتعلق بالمنظمات والمؤسسات) في جامعة ستانفورد، في ذلك الوقت أن هذه المعلومات تنطوي على كنز لا يقدر بثمن من الأفكار الموحية.
فعلى سبيل المثال، كشفت هذه المعلومات عن أن عدد المثليين الذين يحبون أدوات التجميل من ماركة "ماك" أكثر بقليل من عدد الرجال من ذوي التوجهات الجنسية الطبيعية الذين يحبون الماركة نفسها. واستخلص كوزنسكي هذه المعلومة من بعض البيانات المتوافرة لديه وذلك لأنه ما كان ليتمكن من تمييز أن شخص ما من المستخدمين لفيسبوك لديه توجهات جنسية مثلية من مجرد ضغطة واحدة على مفتاح "أعجبني".
لكن كلما ارتفع عدد الضغطات على مفتاح الإعجاب، كلما تمكن الباحث من التوصل إلى تخمينات أدق للتوجهات الجنسة، والانتماءات الدينية، والميول السياسية، وغيرها من التخمينات.
ويخلص كوزنسكي إلى أنك إذا أبديت إعجابا بسبعين شيئا، فأنه سيعرفك أفضل من أصدقائك، أما بعد 300 علامة إعجاب فإنه سيعرفك بطريقة أفضل من شريك حياتك.
ومنذ ذلك الحين،وضع فيسبوك قيودا حدد فيها نوع البيانات التي يمكن التشارك بها مع مطوري التطبيقات الإلكترونية.
لكن ثمة مؤسسة واحدة فقط ما زالت قادرة على الإطلاع على كل ما يعجبك وما هو أكثر من ذلك، هي مؤسسة فيسبوك نفسها.
فهي المؤسسة التي بإمكانها تحمل دفع رواتب كبيرة لأبرع مطوري التعليم الآلي بهدف استخلاص النتائج.
ويمكننا القول أن فيسبوك فقط يسهل عملية استهداف المستخدمين بالإعلانات.
فمن قد يعترض إذا طلب المعلن من فيسبوك أن يظهر الإعلان لمحبي قيادة الدراجات المقيمين في سبرنغفيلد فقط؟ وهو مثال حي على المبررات التي تستند إليها شركة فيسبوك في الترويج لمفهوم "الإعلانات الموجهة".
وهناك أشياء أخرى يمكن لفيسبوك أن تقوم بها من خلال استغلال ما تعرفه عن المستخدمين، لكنها أشياء قد لا نحبها.
لنضرب مثلا بنشر إعلان لبيع منزل من دون أن يظهر للأمريكيين من أصول أفريقية. وقد تساءلت كل من جوليا أنغوين ومادلين فارنر، اللتين تعملان في موقع بروببليكا الاستقصائي،عن أمكانية نجاح تجربة مثل هذا الاعلان،وقد نجحت بالفعل.
لكن شركة فيسبوك ابدت ندهاشها لسماع هذه النتيجة، وأكدت أن هذا ما كان ينبغي أن يحدث، مبررة ما حدث بأنه "خطأ تقني".
وماذا عن مساعدة المعلنين على فيسبوك في الوصول بإعلاناتهم إلى المستخدمين الذين عبروا عن اهتمامهم بعبارة "كاره اليهود"؟ وهو ما أظهر نفس فريق العمل في بروبوبليكا أنه ممكن. وكررت شركة فيسبوك دهشته متعهدة بألا يحدث ذلك مرة ثانية.
ومن الطبيعي أن يثير ذلك القلق لدينا لأن ليس كل المعلنين يستهدفون الترويج لأشياء مفيدة مثل متجر الدراجات الهوائية، فهناك من يستخدم الإعلانات لنشر رسائل سياسية قد يصعب على المستخدمين وضعها في سياقها الصحيح أو التحقق منها.
وتساءل بعض الخبراء الذين نظروا في أزمة كمبريدج إناليتيكا إلى أي مدى كانت هذه الشركة فعالة حقا. ففي كل عمليات الاستهداف أفاد محللون أن مشاهدة إعلانات فيسبوك عبر الضغط عليها لفتحها مازالت بمعدل أقل من واحد في المئة.
وينبغي نقلق حيال كفاءة فيسبوك غير المشكوك فيها في وضع المزيد من الإعلانات التي تستحوذ على قدر كبير من اهتمامنا وتجعلنا ملتصقين بالشاشات.
وكيف سندير التزاماتنا في عالم التواصل الاجتماعي الجديد الجريء؟
ينبغي أن ننمي لدينا نوعا من الذكاء العاطفي بشأن الأثر الذي يحدثه فينا اللوغارتم. وإذا كان نيل الاستحسان الاجتماعي (اعجاب الآخرين) حيويا بالنسبة لنا ولا يقل أهمية من الأكسجين، فربما يكون المزيد من "حب الذات" هو الإجابة الأكثر دقة.
فإذا رأيت أي رسومات كوميكس عن هذا الموضوع سأكون متأكدا من أنني سأضغط على "علامة الإعجاب".

Thursday, June 13, 2019

旱灾死亡人数超过其他灾害致死人数的总和

2015年,当世界各国政府被问及将如何应对气候变化时,为什么140多个国家都提及土地问题呢?

联合国防治荒漠化公约》( )执行秘书莫妮卡·巴布说,答案是干旱。

从非洲向欧洲移民的社会和政治影响大家有目共睹,但不知诸位是否意识到这些移民全都来自干旱的地区?”巴布最近在与一些前往德国波恩报道联合国气候峰会的记者们交谈时曾经这样问他们。

巴布解释说,“大多数人唯一的财产就是土地,由于气候变化,人们的土地资源越来越贫瘠。每年旱灾导致的死亡人数都超过其他灾害的致死人数总和。今年,非洲之角有2500万人失去了赖以生存的基础。”

这个问题是可以解决的——每英亩土地的恢复成本仅不到300美元(1986人民币)。巴布表示,为满足日益增长的人口需求,恢复土地势在必行。每年需要新增四百万公顷(六千万亩)可耕土地。

而这些新增土地从哪里来呢?唯一的解决办法是恢复退化的土地。全球有20亿公顷的退化土地具备恢复潜力。据巴布的观点,只要恢复其中3亿公顷的土地就可以确保2050年之前的全球粮食供应安全,并且还可以使二氧化碳的排放缺口减少三分之一

巴布表示,人们围绕气候变化的其他应对方法展开了大量讨论,但却“很少提到土壤荒漠化治理这个方法,原因就是这个方法的大部分成本是人工成本,而且也缺少大公司的参与。”

但是土地修复的确可以提高土壤的碳封存能力,所以也开始引起了一些关注。”


做好准备

巴布认为,在一个气候变化日益严峻的时代,所有国家都需要做好应对干旱的准备。目前,美国、澳大利亚、以色列三国已经建立了干旱防范系统。她说:“我们已经开始筹建干旱防范机制。”

该机制以
土地退化零增长( )基金的形式,计划到2018年初筹集3亿美元(19亿元人民币),规模仅次于可再生能源发展基金。巴布说,该基金与可再生能源基金的使用方式一样,以援助资金作为担保,开发符合银行贷款条件的项目

不可持续的耕作方式和气候变化每年导致1200万公顷的土地遭到破坏。巴布称,“我们希望每年恢复相同数量的耕地,争取在2030年达到土地退化零增长的目标。”

她发现,《防治荒漠化公约》仅靠植树造林项目防治荒漠化是不够的。该组织还有必要开展其他相关项目。


巴布说:“土地权属不清会导致荒漠化

牧民与农民之间的水资源冲突日益严峻,并且在世界各地普遍存在。《防治荒漠化公约》的全球行动目标是在这个气候变化的时代,恢复农业的可持续性,特别是恢复边缘地区和旱作农业区的可持续农业。这样才能保留住1万多年来人类文明赖以生存的基础。

Thursday, May 2, 2019

उनकी मौत पर उनके परिवार ने कहा

जेसन से घंटों बात-चीत करने के बाद डॉक्टर ब्रोगार्ड ने बताया कि वो सायनेस्थेसिया का शिकार हैं. ये एक तरह की दिमाग़ी हालत होती है जब दिमाग़ की नसें गड्डमड्ड हो जाती हैं.
दिमाग़ किसी और ही दिशा में काम करने लगता है. दिमाग़ जिस चीज़ के बारे में सोचता हो वो या तो सिर्फ़ दिमाग़ में रहती हैं या फिर उसकी सोच के मुताबिक़ ही हरेक चीज़ नज़र आने लगती है.
डॉक्टर ब्रोगार्ड ने हेलसिंकी की आल्टो यूनिवर्सिटी की ब्रेन रिसर्च यूनिट में जैसन के कई ब्रेन स्कैन किए. उसी से पता चला कि जेसन के दिमाग़ के कुछ हिस्सों में समझने की ताक़त नहीं है. लेकिन, वो कुछ ख़ास तरह की तस्वीरें उकेर सकता है.
जेसन ने अपने तज़ुर्बे की बुनियाद पर एक किताब लिखी जिसका नाम है 'स्ट्रक बाय जीनियस'. उन्होंने दुनिया भर में जाकर लोगों को अपनी कहानी बताई और लोगों को गणित सिखाया.
2002 में 12 सितंबर की उस रात जिन दो लोगों ने जेसन पर हमला किया था, उन्हें कभी भी अपराधी नहीं ठहराया गया. हालांकि जेसन ने दोनों को पहचान लिया था. अलबत्ता इन हमलावरों में से एक ने उन्हें ख़त लिखकर माफ़ी मांगी.
जेसन कहते हैं आज उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है. उस एक चोट ने उन्हें दुनिया में नज़र आने वाली हरेक चीज़ में ऐसी आकृतियां दिखानी शुरू कर दीं जो किसी और को नज़र नहीं आतीं.
मिसाल के लिए अगर बारिश की बूंदें गिरती हैं तो पेगेट को उन बूंदों में अनगिनत आकृतियां नज़र आती हैं जो एक दूसरे पर तारों की तरह या बर्फ की बूंदों की तरह लहराती हैं.
जेसन सोचते हैं जो कुछ वो देख पाते हैं काश उसे ज़माना भी देख पाता. उन्हें आज सितंबर की उस रात के हादसे का कोई अफ़सोस नहीं है. आज वो एक ख़ुशहाल ज़िंदगी जी रहे हैं.
हांगकांग के रिहाइशी इलाकों के घने टॉवरों का जंगल वहां रिहाईश के
साल 2002 में नौकरी छोड़ने तक उन्होंने यहां 8 साल तक काम किया. एक साल बाद उन्होंने टॉवर ब्लॉक की तस्वीरें लेनी शुरू कर दीं.
यही आगे चलकर 'आर्किटेक्चर ऑफ़ डेंसिटी' के रूप में सामने आया.
संकट का प्रतीक है. यहां लाखों परिवार छोटे छोटे घरों में रहते हैं.
लेकिन फ़ोटोग्राफ़र माइकल वुल्फ़ ने इन घनी बिल्डिंगों में भी सुंदरता के पहलू ढूंढ निकाले, बिना इस बात को नज़रअंदाज़ किए कि इसमें रहने वालों की ज़िंदगी वाकई कितनी कठिन है.
बीते 24 अप्रैल को 64 साल की उम्र में वुल्फ़ की हॉग कॉग में मौत हो गई.
11 साल तक चले प्रोजेक्ट आर्किटेक्टर ऑफ़ डेंसिटी के लिए उन्हें जाना जाता है. इसके उन्होंने यहां के रिहाईशी ब्लॉक की तस्वीरें लीं और उनकी इस तरह काट छांट की कि वो बेहद घनी दिखती हैं.
टॉवर ब्लॉक की ये तस्वीरें इतनी अमूर्त दिखती हैं कि किसी को भी इसकी वास्तविकता समझने में कुछ सेकेंड का वक़्त लग सकता है.
बहुत बारीक़ से नज़र डालने पर इसमें रहने वाले लोगों की ज़िंदगी के कुछ पहलू उभर कर सामने आते हैं. मसलन बालकनी में लटके तौलिए, अधखुली खिड़कियां या बाहर सूखने के लिए फैलाई गई टी शर्ट.
साल 3014 में वुल्फ़ ने बीबीसी को बताया था, "एक फ़ोटो पत्रकार के रूप में मुझे अपनी तस्वीरों में कंपोजिशन से परिचित था और दर्शक को तस्वीरों में बांध लेने का काम करना मुझे बेहद पसंद था. जबतक सिर पर आसमान है आप वहां देखते हैं और कुछ तस्वीरें ज़ेहन में रह जाती हैं."
"आर्किटेक्चर के साथ भी ऐसा ही है. अगर आसमान और क्षितिज सामने है तो आप इसके आकार प्रकार के बारे में लगभग अनुमान लगा लेते हैं और कोई भ्रम नहीं रहता. इन तस्वीरों को इस तरह काट छांट मैं केवल इमारतों को नहीं दिखा रहा होता हूं, बल्कि मैं एक रूपक बना रहा होता हूं."
लेकिन उनकी कुछ तस्वीरें ज़िंदगी से बिल्कुल क़रीब भी हैं. 'टोक्यो कंप्रेशन' में उन्होंने इस घनी आबादी वाले जापानी शहर की अंतरंग ज़िंदगी को दिखाया है, जिसमें लोगों के चेहरे ट्रेन की खिड़की से सटे दिखते हैं.
ट्रेन में इतनी भीड़ है कि निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता और अधिकांश लोग अपनी आंख बंद कर लेते हैं या अपने चेहरे पर हाथ रख लेते हैं.
सिरीज़ 'माई फ़ेवराइट थिंग' जैसी अपनी कृतियों में सिटी लाइफ़ की बारीक़ चीजों पर वो फ़ोकस करते हैं.

Monday, April 8, 2019

تقنية جديدة لمساعدة 15 مليون شخص يعيشون بين جبال النفايات

هناك نحو 15 مليون شخص يعيشون ويعملون بين أكوام النفايات في جميع أنحاء العالم، ويبحثون في القمامة كل يوم عن أشياء يمكن بيعها. وتتكون "مدن القمامة" هذه من أكواخ وعشش مبنية من الخشب والصفائح المعدنية والبلاستيكية. وتعيش عائلات بين أكوام النفايات الطبية والإلكترونية ونفايات المنازل والزجاج المكسر، وحتى النفايات السامة. ويمكن أن تنهار أكوام القمامة في أي لحظة وبدون سابق إنذار.
وفي عام 2000، انهار مقلب نفايات باياتاس في مانيلا، التي تعد واحدة من أكبر مدن القمامة في الفلبين ويقطنها 10 آلاف مواطن، مما أدى إلى انهيار أرضي بارتفاع 30 متراً وعرض 100 متر، ومقتل أكثر من 200 شخص.
وفي عام 2015، انهار مقلب نفايات ضخم على مشارف العاصمة الأثيوبية، مما أدى إلى مقتل أكثر من 100 شخص وتدمير المنازل المؤقتة هناك.
ودائما ما يكون عدد الناجين من هذه الكوارث قليلا، نظراً لطبيعة المواد المنهارة واحتمال انبعاث غاز الميثان داخل أكوام القمامة، مما يتسبب في تسمم من يعلقون داخل تلك الانهيارات.
وحسب تقرير للبنك الدولي بعنوان "وات أ ويست" (يا لها من نفايات)، من المتوقع أن يخلف سكان العالم 3.4 مليار طن من النفايات سنوياً بحلول عام 2050، بزيادة هائلة عن الكمية الحالية والتي تصل إلى 2.01 مليار طن.
وتمكن باحثون أستراليون في الآونة الأخيرة من تطوير برمجيات يمكنها تتبع الانهيارات الأرضية قبل وقوعها بأسبوعين، وهو ما يمنح سكان المناطق التي توجد فيها مكبات النفايات الوقت الكافي للرحيل، والمهندسين الوقت اللازم لتأمين المنطقة. ويعتمد نظام الذكاء الاصطناعي على الرياضيات التطبيقية للمساعدة في تحديد علامات الانهيار الوشيك، مثل التشققات الصغيرة والحركات الخفية التي تنذر بانهيارات عنيفة.
ويأمل الباحثون أن تساهم هذه الأنظمة في مراقبة تلال النفايات ومنع وقوع الكوارث.
تقول أنطوينيت تورديسيلاز، من كلية العلوم بجامعة ميلبورن وأحد الكتاب الرئيسيين لهذه الدراسة: "نعكف على دراسة البيانات المتعلقة بحركة المواد الحبيبية لفهم إيقاع سقوطها".
وشملت التجارب المعملية التي أجرتها تورديسيلاز أنواعاً مختلفة من المواد الحبيبية، مثل الرمل والخرسانة والحجارة والسيراميك، والتي وُضعت في أكوام بطريقة تجعل المواد الصلبة تتفتت وتنهار. تقول تورديسلاز: "اكتشفنا أن هناك إيقاعا يمكن تمييزه في المراحل التي تسبق الانهيار".
وتعتمد هذه التقنية على قوانين الفيزياء، بمعنى أنها تأخذ في الحسبان حركة الأرض، وديناميكيات السقوط والأسباب المباشرة للانهيارات الأرضية، مثل سقوط الأمطار، الذي يؤدي إلى خلخلة التماسك بين مكونات القمامة، بهدف التوصل إلى بيانات يمكن الاعتماد عليها.
وفي النهاية، يمكن استخدام هذه البيانات للمساعدة في توقع الانهيارات قبل حدوثها في أماكن مثل مواقع النفايات والمناجم والجبال شديدة الانحدار.
ويتكون المنحدر الطبيعي من جزيئات، مثل الصخور أو الطين، تماسكت مع بعضها البعض عبر آلاف السنين. لكن تلال النفايات تتشكل من كتل صلبة مثل البلاستيك والزجاج والمعادن ومواد عضوية وورق، وهو ما يعني أنها غير متماسكة وقد تنهار بسبب أي اهتزاز حتى لو بسيط.
ويرجع عدم تماسك مقالب النفايات إلى عدة أسباب، من بينها أن هذه النفايات يجري تجميعها بطريقة غير صحيحة، بالإضافة إلى تحلل النفايات العضوية ووجود أسطح تساعد على الانزلاق داخل أكوام النفايات، والرطوبة، وانبعاثات غاز الميثان، وإلقاء القمامة في أماكن غير مصممة لاستيعاب الكميات الزائدة منها.
يقول إيزاك أكينوومي، محاضر في مجال الهندسة الجيوتقنية بجامعة كوفينانت النيجيرية: "بعض هذه العوامل يجعل التنبؤ المبكر بوقوع الانهيارات في تلال النفايات أكثر صعوبة من التنبؤ بالانهيارات الأرضية".
وبالتالي، هناك حاجة ماسة لتكنولوجيا قادرة على توقع هذه الانهيارات، خاصة في البلاد النامية، حيث تكون تلال النفايات في تلك البلدان أكثر انحداراً مما تسمح به القوانين في كل من الولايات المتحدة وبريطانيا، كما أن النفايات لا يجري تجميعها بنفس الطريقة، ولا تولي شركات إدارة النفايات أهمية لاستقرار مقالب النفايات، وهو الأمر الذي يساهم في حدوث الانهيارات.
ويمكن لهذه التكنولوجيا أن توفر معلومات بشأن الانهيار الوشيك، وهو الأمر الذي قد يساعد العمال على تدعيم المواقع وتقويتها أو القيام بعمليات الإخلاء. لكن حتى تكون هذه التكنولوجيا فعالة، يتعين على الباحثين وهيئات إدارة النفايات أن يتغلبوا على العقبات المالية والسياسية والقانونية.
وتحتاج عملية تقدير الأخطار وتركيب المعدات التكنولوجية إلى تكلفة ربما لا ترغب في تحملها الهيئات المحلية، كما أن نقل المواطنين من أماكن سكنهم أثناء عمليات الإخلاء أو تدعيم مواقع النفايات قد يكون صعبا من الناحية اللوجستية.
لكن لن يكون بإمكان هذه التكنولوجيا القضاء على المشاكل البيئية طويلة المدى الناتجة عن مكب النفايات ذاته، مثل انبعاثات الهواء وتفشي الأمراض وسمية المواد التي تحتويها النفايات.
يقول ديفيد بيدرمان، المدير التنفيذي لرابطة النفايات الصلبة لأمريكا الشمالية: "من المهم للغاية اختبار هذه التكنولوجيا لمعرفة ما إذا كانت تقدم حلاً لمشكلة انهيارات النفايات المتزايدة أم لا. في الحقيقة، قد يكون هذا تحسنا مؤقتا وجيدا على طريق إغلاق مقالب النفايات."
ولا تشكل هذه التكنولوجيا حلا سحريا وما تزال إلى حد بعيد في مراحلها الأولى، لكن يمكنها أن تغير شكل وطبيعة جهود الإغاثة في كوارث انهيار تلال النفايات بسبب قدرتها على التنبؤ بالانهيارات قبل وقوعها.

Monday, April 1, 2019

صحف تبحث التوقعات بشأن ما يمكن أن تخرج به أعمالها

علّقت صحف عربية على القمة العربية الثلاثين التي تنطلق أعمالها اليوم في العاصمة التونسية.
ويرى كُتّاب أن قضية اعتراف الولايات المتحدة بسيادة إسرائيل على الجولان، إضافة إلى قرارها السابق بنقل سفارتها من تل أبيب إلى القدس، يستدعيان موقفاً عربياً موحداً.
وفي الوقت نفسه، استبعد كُتّاب آخرون أن تتمخض القمة عن موقف قوي، متوقعين أنها ستنعقد وتنفض دون موقف ملموس على الأرض.
وتضيف "تعتبر سوريا أحد أبرز النقاط الخلافية التي طرحت في قمة تونس بعد أن كان الحديث يدور قبل أشهر من انعقادها حول إمكانية رفع التجميد عنها، لكن يبدو أن الإجماع العربي بشأن هذه النقطة قد غاب وذلك بسبب اعتراض عدد من الدول العربية لعدم استقرار الوضع في هذا البلد وغياب تسوية سياسية به".
ويقول أسامة الغزالي حرب في "الأهرام" المصرية "اليوم، ووسط أجواء عربية محبطة، بعد قراري الرئيس الأمريكي دونالد ترامب الاعتراف بالقدس عاصمة لإسرائيل وبضم هضبة الجولان المحتلة إلى إسرائيل، تنعقد القمة العربية الثلاثون في تونس".
وبنبرة من التشاؤم يضيف الكاتب "لا أتوقع الكثير من تلك القمة في ضوء التاريخ الطويل للقمم العربية، الذي ينبئنا بأن مجرد انعقادها في ذاته لا ينطوي على أي مغزى للقوة أو الفاعلية".
ويختم مقاله بالقول "أي نوع من القمم ستكون تونس؟ في ضوء الأوضاع الحالية الدولية والعربية، لست متفائلاً على الإطلاق".
وبالمثل، يقول فهد الخيطان في "الغد" الأردنية "ليس ثمة شيء يمكن الرهان عليه في قمة تونس بقدر السوء الذي كانت عليه الأوضاع العربية في قمم سابقة، إلا أن الحالة الراهنة هي الأسوأ على الإطلاق".
ويرى أن مسودة البيان الختامي للقمة وإعلان تونس "يعطيان الانطباع بأن هنالك اتفاقاً عربياً وافياً وشاملاً على الأولويات، وتطابقاً في المواقف. لكن ذلك في الحقيقة على الورق فقط، أما في الواقع فالخلافات والتباينات في المواقف هي الحقيقة الثابتة".
ويشير إلى أن "المستجدات على المسرح الدولي والإقليمي كانت تستدعي قمة عربية بمنهجية مختلفة وقرارات تتجاوز الأسلوب التقليدي المتبع في قمم سابقة، غير أن الانقسامات الحاصلة في الجسم العربي، والانشغال في الأزمات يربك الجميع ويحول دون بناء مواقف صلبة ومتماسكة".
عودة سوريا
ويقول فاروق يوسف في جريدة "العرب" اللندنية "إذا كانت عودة سوريا إلى الجامعة العربية غير ممكنة في المرحلة الحالية لعدم التوافق العربي عليها، فإن الأولى بالقمة العربية أن تضع المسألة السورية في مقدمة الفقرات التي يجب أن تُناقش بطريقة مختلفة عن الطريقة التقليدية التي قادت سوريا إلى عزلتها".
ويضيف "ليس المطلوب إعلان الصلح مع النظام. فذلك أمر لم يعد ذا قيمة بالنسبة للشعب السوري، إضافة إلى أن النظام نفسه سيشعر من خلاله بأنه انتصر على العرب الذين خذلوه في أوقاته العصيبة".
ويؤكد الكاتب أن "المطلوب فعلياً أن يستوعب العرب أهمية دورهم الخلاق في إعادة إعمار سوريا، وأن يقفوا موحدين عند خط الشروع في تعويض الشعب السوري عن الجزء المتيسّر من خساراته وهو الجزء المادي. أما الكارثة الإنسانية التي لحقت به فهي ما لا يمكن تعويضه".
ويتساءل عبد المحسن سلامة، رئيس مجلس إدارة "الأهرام" المصرية "هل تشهد اجتماعات القمة العربية... نوبة صحيان وإفاقة عاجلة كي تستطيع مواجهة التحديات العديدة التي تواجه العالم العربي الآن؟".
ويقول "الوضع في سوريا لا يختلف كثيرا عن ليبيا، فلا تزال سوريا، رغم كل النجاحات الكبيرة... تعاني الانقسام والتشرذم وانقسام السيادة بين مجموعات مختلفة على الأراضي السورية، وهو ما يجب أن ينتهي تماماً لتعود الدولة السورية دولة موحدة كما كانت دائماً".
ويرى الكاتب أن القمة العربية وإن كانت "لن تستطيع وضع الحلول السحرية" لكل المشكلات العربية "لكنها تستطيع أن تقدم روشتة تتضمن خطوات محددة ورؤية موضوعية للخروج من تلك المشكلات، بعد أن أصبح الخطر قريباً جداً من كل الدول العربية بلا استثناء".

Thursday, March 21, 2019

كيف يمكن للغرب أن يحمي مواطنيه المسلمين من اليمين المتطرف؟

ألقت الشرطة النيوزيلندية، الجمعة 15 مارس/آذار، القبض على ثلاثة أشخاص ووجهت اتهامات بالقتل لرجل آخر بعد مقتل 49 شخصا وجرح 20 آخرين على الأقل في هجومين استهدفا مصلين في مسجدين في مدينة كرايست شيرش في نيوزيلندا.
وأقدم رجل مسلح، عَرَّف نفسه في لقطات بثها مباشرة على مواقع التواصل الاجتماعي أثناء هجومه، بأنه استرالي يبلغ من العمر 28 عاما. وأظهر القاتل هجومه وهو يطلق النار بشكل عشوائي على رجال ونساء وأطفال من مسافة قريبة داخل مسجد النور.
وتعليقا على الحادثة، وصفت رئيسة وزراء نيوزيلندا، جاسيندا أردرن، الاعتداء بأنه هجوم إرهابي مخطط له جيدا، وقالت "كان هذا أحد "أحلك الأيام في بلادنا".
وبالتزامن، أدان رئيس الوزراء الاسترالي، سكوت موريسون، الهجوم بشدة ووصف منفذه، الذي يحمل الجنسية الاسترالية، بأنه إرهابي من"اليمين المتطرف".
وفي تبريره لما أقدم عليه، قال مقترف الهجوم، في رسالة نشرها على مواقع التواصل الاجتماعي، إن أسباب هجومه ترجع إلى "التزايد الكبير لعدد المهاجرين". كما فسر سبب اختياره لهذا المسجد تحديدا، بزيادة عدد رواده.
وأضاف مرتكب الحادثة في رسالته أن "أرضنا لن تكون يوما للمهاجرين، وهذا الوطن الذي كان للرجال البيض سيظل كذلك ولن يستطيعوا يوما استبدال شعبنا".
ودعت الشرطة الجمهور إلى عدم نشر وتبادل مقاطع الفيديو "المفجعة" على الإنترنت. وقال فيسبوك إنه أزال حسابات المسلح على فيسبوك وانستغرام، وإنه يعمل على إزالة أي نسخ من اللقطات الدمويةهل تعاملت الحكومات الغربية بجدية كافية مع صعود اليمين المتطرف؟
هل تحمي الحكومات الغربية المسلمين من المتطرفين اليمينيين؟
وكيف يمكن لمسلمي الغرب التعامل مع مثل تلك الهجمات؟
سنناقش معكم هذه المحاور وغيرها في حلقة الجمعة 15 مارس/آذار من برنامج نقطة حوار الساعة 16:06 جرينتش.
خطوط الاتصال تفتح قبل نصف ساعة من البرنامج على الرقم 
فتحت المذبحة الدموية التي شهدتها مدينة (كرايست تشيرش) في نيوزيلندا مؤخرا، والتي قتل خلالها إرهابي يميني متطرف، خمسين شخصا في مسجدين بالمدينة خلال صلاة الجمعة، فتحت الباب على مصراعيه أمام نقاش واسع، حول تأثير صعود أحزاب اليمين الشعبوي المتطرف في الغرب، وخاصة في أوربا، وما يشكله خطابه السياسي من خطر، قد يزكي الميل إلى ارتكاب أعمال عنف من قبل تابعيه.
ولم تخل الصحف الغربية فضلا عن الصحف العربية، من التحذيرات في أعقاب تلك المذبحة الدموية، والتي أبرزت الخطر الذي بات يشكله صعود اليمين المتطرف في الغرب، وما قد يسفر عنه من أن تنحو ظاهرة "الاسلاموفوبيا"، منحى دمويا خطيرا، قد يغذي على الجانب الآخر نشاط الحركات الإسلامية المتشددة.
وفي الوقت الذي انتقد فيه كتاب في صحف عربية، الرئيس الأمريكي دونالد ترامب، لعدم إدانته هجوم نيوزيلندا، وعدم وصفه له بالإرهابي واعتباره من وجهة نظرهم، أكثر السياسيين الغربيين إقصاء للإسلام وانتقادا له في العديد من المناسبات، حذرت العديد من الصحف الغربية سواء في الولايات المتحدة أو في أوربا، من تنامي التيار اليميني في الغرب ووجود سياسيين متطرفين يغذون ذلك الاتجاه لدى جماهير اليمين المتطرف.
وقالت صحيفة النيويورك تايمز في تقرير لها عقب مذبحة (كرايست تشيرش)، إن المذبحة تعد أحدث دليل،على تنامي أيديولوجية اليمين المتطرف في الغرب، والقائمة على فكرة تفوق العرق الأبيض، داعية إلى اجتثاث هذه المشكلة من جذورها.
وأضافت أن فكرة أن "المسلمين يمثلون تهديدا"، تتردد أصداؤها في سياسات يعتمدها الرئيس الأمريكي دونالد ترامب، ضاربة مثالا بموقف الرئيس الأمريكي من المهاجرين، والذي عبر عنه في عدة إجراءات منها سعيه لبناء سور على الحدود مع المكسيك، وذكرت الصحيفة في هذا الصدد، بتحذير ترامب السابق لبريطانيا من "فقدان ثقافتها" بسبب المهاجرين، وأن الهجرة "غيرت النسيج الأوروبي"، داعيا إلى "اتخاذ إجراء سريع".
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